घर लौटते वक़्त कहीं
फिसल न जा ना जाना;
तेरी गली से गुज़रते हुए
यादों की बारिश हुई...
फिसल न जा ना जाना;
तेरी गली से गुज़रते हुए
यादों की बारिश हुई...
तुझसे मिलते रहने के लिए मुलाक़ात ज़रूरी नहीं।
यूँही ख्वाबों में बहने के लिए हकीकत ज़रूरी नहीं...
हर मौसम गुज़रा है तेरे बेगैर मगर तेरे साथ ही।
राधा बनु या मीरा,इंतज़ार का अंत ज़रूरी नही...
स्वयंसेवक आशिक़ों की
कमी नहीं।
पूछते रहते हैं
क्या सेवा कर सकता हूँ।
जैसे मेरी मदद करने से
उनको मोक्ष प्राप्ति होगी।
एकदिन मांग ली सहायता
तो वे परेशान हो गए।
बस इतना ही कहा था के
बहुत दिनों से रोया नहीं।
रुला सकते हो मुझे?
मुझे पता है तुम्हारी बालकॉनी से समंदर दिखता है... तुम हर खुशी के मौके पे दौड़के आते हो वहां; कभी कभी रोने भी... कभी चाहनेवालों को हाथ ह...